हमारे भरतपुर के उमरैन्ड गांव में पानी की बड़ी परेशानी रहती है. गर्मी के मौसम में कभी कभी तो पीने के पानी की भी परेशानी हो जाती है. कुछ लोगों को काफी दूर से पानी लाना पड़ता है.

गांव के कुछ बोर वेल में कभी कभी 800-900 फुट खोदने के बाद पानी मिलता है. ये पानी लोगों की ज़रुरत के लिए काफी नहीं है और दिवाली के आते आते पानी की किल्लत हो जाती है. कई बार कुएं भी सूख जाते हैं जिसके कारण लोगों को बहुत परेशानी होती है.

हमारे गांव में एक नाला बहता है जो सभी के लिए पानी का स्रोत है. गांव के लोग पिछले 15-16 साल से उसपर एक बांध बनवाना चाहते थे ताकि पूरे साल भर के लिए उसके लिए पानी की समस्या का समाधान हो सके. सालों तक प्रशासन से इस बारे में बात करने के बाद भी गांव के लोगों को सफलता नहीं मिल पा रही थी. मैंने खुद इस बारे में सरकार के आला अधिकारीयों से मिल कर बांध बनवाने की गुज़ारिश की थी.

उसके बाद हमने मदद के लिए कोका-कोला के आनंदना फाउंडेशन के पास अपनी बात रखी. हमारे इंजीनियर मिलिंद पंडित और आनंदना फाउंडेशन के साथ काम करने से सिर्फ छह महीने में ये बांध बन कर तैयार हो गया  है.

मेरे लिए ये सपना था और अब ये सपना सच हो गया है. पिछले दो महीने में बारिश हुई है और इस बांध में चार बार बारिश का पानी रुका है. गांव का हमारा नाला भी अब जीवित हो गया है और उसमे पानी बहने की आवाज़ लोगों के कानों में सुनाई देती है.

लेकिन इसका फायदा सिर्फ हमारे गांव को ही नहीं मिल रहा है. आस पास के 6-7 गांव के बोर वेल और कुओं में पानी का स्तर पहले से बेहतर हो गया है.

तुलसी राम  उमरैन्ड गांव के पूर्व सरपंच हैं